काल की परिभाषा ,भेद ,प्रकार एंव उदाहरण |काल की परिभाषा और भेद

काल की परिभाषा ,भेद ,प्रकार एंव उदाहरण –

 “क्रिया के जिस रूप से उसके (क्रिया के) होने का समय तथा उसकी पूर्णता या अपूर्णता का बोध हो, उसे ‘काल’ कहते हैं।”

नीचे लिखे उदाहरणों को देखें-

1. शकुन्तला सिलाई-कढ़ाई सीखती है।
2. शकुन्तला ने बी० ए० तक पढ़ाई की।
3. शकुन्तला एम० ए० की पढ़ाई करने दिल्ली जाएगी।
विश्लेषण : प्रथम वाक्य की क्रिया से उसकी अपूर्णता और ‘इस समय’ का बोध हो रहाहै। दूसरे वाक्य की क्रिया से उसकी पूर्णता और ‘बीते समय’ का तथा तीसरे वाक्य की क्रिया सेउसकी अपूर्णता एवं ‘आनेवाले समय’ का बोध हो रहा है।

इस तरह काल के तीन प्रकार हुए-
1. इस समय का बोध करानेवाला
2. बीते समय का बोध करानेवाला और
3. आनेवाले समय का बोध करानेवाला।

प्रथम को वर्तमानकाल, द्वितीय को भूतकाल और तृतीय को भविष्यत् काल के नाम सेजाना जाता है। अब प्रत्येक को विस्तार से समझें-

1. वर्तमान काल की परिभाषा और भेद
“जिस काल का आरंभ तो हो चुका हो; पर समाप्ति नहीं हुई हो, उसे ‘वर्तमान काल’ (Present Tense) कहते हैं।” यानी वर्तमान काल गुजर रहे समय में होनेवाले कार्यों के बारेमें बताता है।

जैसे-

वह सदा बड़ों का कहना मानता है।
दीपू परीक्षा की तैयारी कर रहा है।

वे आज भी रिसर्च कर रहे होंगे।

वर्तमान काल के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं-

1. सामान्य वर्तमान काल की परिभाषा और भेद

सामान्य वर्तमान (Present Indefinite/Simple Present) से स्वभाव, आदत, चर्या,सामान्य जीवन-क्रम अथवा घटनाक्रम की अभिव्यक्ति होती है।

जैसे-

वह प्रतिदिन देर से घर लौटता है।
बंगाली चावल और पंजाबी रोटी ज्यादा खाते हैं।
गाय मीठा दूध देती है।
यह बस स्कूल जाती है।
सामान्य वर्तमान की क्रिया ‘धातु’ में ता/ते/ती जोड़कर आवश्यकतानुसार है/हो/हूँ लगाकर बनाई जाती है।

जैसे-

जा + ता/ ते / ती + है| हैं। हो/ हूँ
पढ़ + ता/ ते/ ती + है । हैं| हो/ हूँ

2. तात्कालिक वर्तमान  

इस काल को ‘अपूर्ण वर्तमान’ (Present Imperfect Tense) भी कहा जाता है। इसकाल की क्रिया जारी रहती है यानी इससे सातत्यता का बोध होता है। जब किसी धातु में रहा |रहे | रही के बाद है। हैं| हो/हूँ जोड़ते हैं, तब तात्कालिक वर्तमान की क्रिया बन जाती है।
जैसे-

जा + रहा / रहे | रही + है | हैं | हो / हूँ

(खा) + रहा / रहे | रही + है | है | हो / हूँ

  • लता मंगेशकर गीत गा रही हैं।
  • जाकिर हुसैन तबला बजा रहे हैं।

तात्कालिक वर्तमान (सातत्यबोधक) का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है :

1. कथन के समय चल रहे कार्य-व्यापार का निर्देश करने के लिए।

जैसे-

वह इस समय रियाज कर रहा है, उसे परेशान मत कीजिए।
नानीजी अभी नहा रही हैं, इसलिए वे अभी नहीं आ सकतीं।
लगातार चलनेवाले कार्य-व्यापार का निर्देश करने के लिए।

जैसे-

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कर रही है।
समय का कुचक्र चल रहा है।

3. किसी खास समय में चल रहे कार्य-व्यापार की अभिव्यक्ति के लिए ।

जैसे- 

मैं आजकल होम्योपैथिक दवा ले रहा हूँ।

वह आजकल समाज-विज्ञान का अध्ययन कर रहा है।

4. निकट भविष्य अथवा निश्चित भविष्य का निर्देश करने के लिए।

जैसे-

मैं अगले रविवार को कोलकाता जा रहा हूँ।
आप प्रतीक्षा कीजिए, वह अभी आ रहा है।

 3 संदिग्ध वर्तमान काल की परिभाषा  

“जिस वर्तमानकालिक क्रिया से संदेह प्रकट हो, उसे ‘संदिग्ध वर्तमान’ (Present Doubtful)की क्रिया कहते हैं।”
इस काल की क्रिया की संरचना इस प्रकार होती है-
धातु + ता/ते/ती/रहा/रहे/रही + होगा/होगे/होगी/होंगे/होंगी ।

जैसे-

हिमालय में वर्षा होती होगी/हो रही होगी ।
सोनी अपने भैया को पत्र लिखती होगी/लिख रही होगी।
निम्नलिखित वाक्यों में आवश्यकतानुसार ता होगा/ती होगी/ते होंगे/ रहा होगा/रहे होंगे/रही

 वर्तमानकालिक क्रियाओं की रूपावली
सामान्य वर्तमान (‘बैठ’ धातु) पुंल्लिंग

एकवचन                बहुवचन
उत्तम पुरुष  (मैं) बैठता हूँ        (हम) बैठते हैं
मध्य पुरुष   (तू) बैठता है    (तुम) बैठते हो
अन्य पुरुष  (वह) बैठता है। (यह) बैठता है  (वे ) बैठते हैं। (ये )बैठते हैं

स्त्रीलिंग

एकवचन          बहुवचन
उत्तम पुरुष  (मैं) बैठती हूँ   (हम) बैठती हैं
मध्य पुरुष    (तू) बैठती है (तुम) बैठती हो
अन्य पुरुष   (वह) बैठती है। (यह) बैठती है (वे ) बैठती हैं। (ये) बैठती हैं

संदिग्ध वर्तमान पुंल्लिंग

एकवचन            बहुवचन
उत्तम पुरुष (मैं) बैठता हूँगा/बैठ रहा हूँगा       (हम) बैठते होंगे/बैठ रहे होंगे
मध्य पुरुष   (तू) बैठता होगा/बैठ रहा होगा   (तुम) बैठते होगे/बैठ रहे होगे
अन्य पुरुष  (वह) बैठता होगा/ (यह) बैठ रहा होगा बैठते होंगे    (वे/ये) बैठते होंगे/बैठ रहे होंगे

स्त्रीलिंग

एकवचन    बहुवचन
उत्तम पुरुष  (मैं) बैठती हूँगी/बैठ रही हूँगी (हम) बैठती होंगी/बैठ रही होंगी
मध्य पुरुष (तू) बैठती होगी/बैठ रही होगी (तुम) बैठती होगी/बैठ रही होगी
अन्य पुरुष   (वह/यह) बैठती होगी/बैठ रही होगी (वे/ये) बैठती होंगी/बैठ रही होंगी

तात्कालिक वर्तमान पुँल्लिंग

एकवचन बहुवचन
उत्तम पुरुष  (मैं) बैठ रहा हूँ        (हम) बैठ रहे हैं
मध्य पुरुष  (तू) बैठ रहा है    (तुम) बैठ रहे हो
अन्य पुरुष  (वह यह) बैठ रहा है       (वे/ये) बैठ रहे हैं

स्त्रीलिंग

एकवचन    बहुवचन
उत्तम पुरुष (मैं) बैठ रही हूँ     (हम) बैठ रही हैं
मध्य पुरुष  (त) बैठ रही है   (तुम) बैठ रही हो
अन्य पुरुष  (वह/यह) बैठ रही है       (वे/ये) बैठ रही हैं

     नोट : इसी तरह सभी धातुओं की वर्तमानकालिक रूपावली बनाई जाती है।     

2. भूतकाल काल की उदहारण  
“क्रिया के जिस रूप से उसके बीते हुए समय में उसकी (क्रिया की) पूर्णता या अपूर्णताका बोध हो, ‘भूतकाल’ (Past Tense) कहलाता है।”

जैसे-
1. मेरा बचपन बीत गया।
2. वह परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
3. नेताजी ने गरीबी दूर करने की बात कही होगी।
4. कालिदास ने ‘मेघदूत’ लिखा है।
5. प्रेमचंद ने ‘गोदान’ लिखा था।
6. परसों शिमला में वर्षा होती थी।
7. उसने अच्छी तैयारी की होती तो परीक्षा पास कर जाता।

विश्लेषण : (a) उपर्युक्त सभी वाक्यों में प्रयुक्त क्रियाओं से बीते हुए समय का बोध हो रहा है। (b) (i), (iii), (iv) एवं (v) वाक्यों में क्रिया की पूर्णता और शेष वाक्यों में क्रिया की पूर्णता दिखाई पड़ रही है।

भूतकाल के छह प्रकार होते हैं :

1. सामान्य भूत काल की उदहारण  
सामान्य भूतकाल (Past Indefinite/Simple Past) की क्रिया से सिर्फ यह जान पड़ताहै कि क्रिया बीते हुए समय में हुईं, यह नहीं कि काम को हुए अधिक देर हुई या थोड़ी देर ।

इस काल की क्रिया की संरचना इस प्रकार होती-
‘धातु + आ/ए/ई’ अथवा ‘धातु + चुका/चुके/चुकी’ या ‘धातु + या/ये यी, जैसे-
अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया।
मि० टनाका ने वह नजारा देखा।
जापान उस घटना को भूल चुका ।

2. आसन्न भूत काल की उदहारण  

“क्रिया के जिस रूप से उसकी समाप्ति निकट भूत में या तत्काल सूचित होती है, उसे
आसन्न भूत’ (Present Perfect Tense) की क्रिया कहते हैं।”

इस काल को ‘पूर्णवर्तमान’ के नाम से भी जाना जाता है; क्योंकि इसकी पूर्णता या समाप्तिवर्तमान के निकट में होती है। इस काल की क्रिया की संरचना के लिए सामान्य की संरचना में सिर्फ है हैं हो हूँ लगाना पड़ता है।

जैसे-
अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया है।
मि० टनाका ने देखा है।

3 पूर्णभुत काल की उदहारण 

“क्रिया के जिस रूप से यह विदित हो कि उसके व्यापार को समाप्त हुए बहुत देर हो। चुकीहैं; यानी कोई क्रिया बहुत पहले हो चुकी है।”
इस काल की क्रिया भी पूर्णताबोधक होती है। इसकी संरचना के लिए सामान्य की संरचना के बाद था/थे थी जोड़ना पड़ता है। उपर्युक्त तीनों वाक्यों का पूर्णभूत (Past perfect Tense)रूप देखें-
अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया था।
मि० टनाका ने देखा था।
जापान उस घटना को भूल चुका था।

4. संदिग्ध भूत काल की उदहारण  

संदिग्ध भूत (Past Doubtful) की क्रिया से बीते हुए समय में क्रिया की पूर्णता में संदेहरहता है।इसकी संरचना के लिए सामान्य भूत की संरचना के बाद होगा/होगे/होगी लगाना चाहिए।
जैसे-
अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया होगा।
मि० टनाका ने देखा होगा।
जापान उस घटना को भूल चुका होगा।

5. अपूर्ण भूत काल की उदहारण और भेद

अपूर्ण भूत (Past Imperfect Tense) की क्रिया से यह विदित होता है कि बीते हुए समय में कोई क्रिया जारी थी यानी पूर्णता को प्राप्त नहीं हुई थी।
इसकी संरचना इस प्रकार होती है-
धातु + रहा/रहे/रही + था/थे थी
या, धातु + ता/ते/ती + था/थे/ थी
जैसे- वैज्ञानिक सूर्यग्रहण का नजारा देख रहे थे/देखते थे।
उस समय ताजमहल का निर्माण कार्य चल रहा था।
नैनीताल में मूसलधार वर्षा हो रही थी।

6. हेतुहेतुमद्भूत काल की उदहारण और भेद

“हेतु’ का अर्थ होता है—’कारण’ या प्रयोजन’ । हेतुहेतुमद्भूत काल (Past Conditional)की क्रिया से यह स्पष्ट होता है कि बीते हुए समय में कोई कार्य या व्यापार सम्पन्न होता; लेकिन किसी कारण से नहीं हो सका ।

जैसे-
अंशु इंजीनियर बन गई होती यदि पॉलिटेक्निक की परीक्षा पास हो जाती।
इस वाक्य में ‘इंजीनियर न बनने का’ स्पष्ट हेतु है-
पॉलिटेक्निक का पास न होना।

भूतकालिक क्रियाओं की रूपावली

‘बैठ’ अकर्मक धातु
सामान्य भूत (पुंलिंग)

पुरुष  एकवचन           बहुवचन
उत्तम पुरुष (मैं ) बैठा          (हम) बैठे
मध्य पुरुष (तू ) बैठा    (तुम) बैठे
अन्य पुरुष (यह वह) बैठा        (वे /ये) बैठे

स्त्रीलिग

एकवचन     बहुवचन
उत्तम पुरुष (मे) बैठी    (हम) बैठी
मध्य पुरुष   (तू) बैठी    (तुम) बैठी
अन्य पुरुष  (वह/यह) बैठी   (वे /ये) बैठी

 आसन्न भूत (स्त्रीलिंग)

एकवचन         बहुवचन
उत्तम पुरुष  (मैं) बैठी हूँ   (हम) बैठी हैं
मध्य पुरु    (तू) बैठी है     (तुम) बैठी हो
अन्य पुरुष  (वह यह) बैठी है    (वे /ये) बैठी हैं।

(पुंलिंग)

 एकवचन              बहुवचन
उत्तम पुरुष (मैं) बैठा हूँ           (हम) बैठे हैं
मध्य पुरुष (तू) बैठा     (तुम) बैठे हो
अन्य पुरुष (वह यह) बैठा है             (वे /ये) बैठी हैं।

पूर्णभूत (पुंलिंग)

 एकवचन             बहुवचन
उत्तम पुरुष (मैं) बैठा था    (हम) बैठे थे
मध्य पुरुष (तू) बैठा था   (तुम) बैठे थे
अन्य पुरुष (वह यह) बैठा था  (वे /ये बैठे थे

स्त्रीलिंग

 एकवचन  बहुवचन
उत्तम पुरुष (मैं) बैठी था       (हम) बैठे थे
मध्य पुरुष  तू) बैठी थी      (तुम) बैठी थीं
अन्य पुरुष  (तुम) बैठी हो       ( वे /ये) बैठी थे।

अपूर्ण भूत (पुंलिंग)

एकवचन                 बहुवचन
उत्तम पुरुष   (मैं) बैठ रहा था/बैठता था     (हम) बैठ रहे थे बैठते थे
मध्य पुरुष   ( न) बैठ रहा था/बैठता था   (तुम) बैठ रहे थे/बैठते थे
अन्य पुरुष  (वह/यह) बैठ रहा था/बैठा था       (वे /ये) बैठ रहे थे बैठते थे

 भविष्यत् काल

“जिस क्रिया से आनेवाले समय में किसी कार्य व्यापार के होने का बोध हो।

जैसे- हम बाजार जाएँगे और आवश्यक सामानों की खरीद करेंगे।
इस वाक्य में ‘जाना’ और ‘खरीद करना’ का रूप भविष्यत् काल में है।

भविष्यत् काल (Future Tense) के भी तीन प्रकार होते हैं-

1. सामान्य भविष्यत् काल की उदहारण  

सामान्य भविष्यत् का व्यवहार भविष्य में कभी होनेवाली क्रिया के लिए, संभावना के लिएअथवा किसी अनिश्चित या अस्थायी रूप से निर्धारित कार्यक्रम के लिए होता है। जिस प्रकारसामान्य वर्तमान का व्यवहार वर्तमान में स्वभावतः होनेवाली क्रियाओं के लिए होता है, उसी प्रकार सामान्य भविष्यत् काल का व्यवहार भविष्य में स्वभावतः होनेवाली क्रियाओं के लिए होता है। इस काल की क्रिया का रूप ‘धातु + गा / गे | गी’ होता है,

जैसे-
माताजी तीर्थयात्रा पर जाएँगी।
वह वायुयान से मुम्बई जाएगा।
मैं प्रातः कॉलेज जाऊँगा।

 2. संभाव्य भविष्यत् काल की उदहारण  

जिससे भविष्य में किसी कार्य या व्यापार के होने की संभावना व्यक्त की जाय।क्रिया के इस रूप से संभावना पर आधारित अनुमान की अभिव्यक्ति होती है। यों तोइसका संबंध किसी काल विशेष से न होकर संभावनार्थक अनुमान से होता है, जो वर्तमान, निकट भविष्य अथवा निकट भूत को अभिव्यक्त करता है। इसमें भी सातत्यबोधक क्रिया-रूपों अथवा भूतकालिक कृदन्तों के साथ भविष्यत्कालिक क्रिया का प्रयोग करने से भविष्यत्कालिक सातत्यबोधक का गठन हो जाता है। इस काल की क्रिया की संरचना इस प्रकार होती है।
शायद हो सकता है /संभव है + कर्ता+ धातु + ए

जैसे-

शायद पिताजी आएँ कहें जाएँ/बोलें।
संभव है, इस माह के अंत तक परीक्षा हो जाए।
शाम होने चली है, अब वह खेत से लौट रहा होगा।
उसे तो एक बहाना मिल गया है। अब वह हर गली-कूचे में यही दुखड़ा रोएगी ।
वह कल देर से लौटा था, शायद दफ्तर में देर तक बैठा रहा हो ।

3. हेतुहेतुमद्भविष्य काल की उदहारण  

इसमें भी भूतकाल की तरह किसी क्रिया का भविष्य में होना या न होना किसी कारण कीउपस्थिति पर निर्भर करता है। जैसे-
इतनी ठंडक रहे तो सारे जल स्रोत ही बर्फ हो जाएँ। वह लगातार इतनी मेहनत करे तो विद्वान् ही हो जाए । ये उनके सामाने इतनी गालियाँ दें तो झगड़ा ही हो जाए। वह रोज इतनी रात को आए तो लोग उसे कुलटा ही कहने लगें।

काल-परिवर्तन :

वर्तमान काल
सामान्य वर्तमान काल -वह बाजार जाता है।
अपूर्ण/तात्कालिक वर्तमान -वह बाजार जा रहा है।
संदिग्ध वर्तमान काल -वह बाजार जाता होगा।
सामान्य वर्तमान

समान्य भुत काल

समान्य भुत काल -वह बाजार जायेगा
सामान्य /सत्यबोध भविस्यत-वह बाजार जायेगा / जा रहा होगा।
शायद वह बाजार जय. सामान्य भविष्यत -सामान्य

भविष्यत् काल

सामान्य भविष्यत् काल  -वह बाजार जाएगा।

सामान्य/सातत्यबोधक भविष्यत् -वह बाजार जाएगा/जा रहा होगा।

संभाव्य भविष्यत् काल। –  शायद वह बाजार जाए।

लेख के बारे में-

इस आर्टिकल में हमने “काल की परिभाषा ” के बारे में पढे। अगर इस Notes रिसर्च के बाद जानकारी उपलब्ध कराता है, इस बीच पोस्ट पब्लिश करने में अगर कोई पॉइंट छुट गया हो, स्पेल्लिंग मिस्टेक हो, या फिर आप-आप कोई अन्य प्रश्न का उत्तर ढूढ़ रहें है तो उसे कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएँ अथवा हमें notesciilgrammars@gmail.com पर मेल करें।

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